देवी लक्ष्मी खुद घर चलकर आएँगी आपके मंदिर में रख ले बस ये 1 चीज़

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दिवाली में माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए लोग ना जाने कौन-कौन सी विधि अपनाते हैं। इन विधियों में बहुत सारी विधियां ऐसी होती हैं जिसको सामान्य लोग को अपनाना थोड़ा असंभव सा प्रतीत होता है।

लक्ष्मी को प्रसन्न करने शास्त्रों में वैसे तो बहुत सारे यंत्रों की चर्चा की गई है लेकिन महामेरु श्री यंत्र इन सभी यंत्रों में सबसे प्रभावशाली यंत्र है। यह यंत्र महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।

महामेरु श्री यंत्र महालक्ष्मी के पराविद्या का साक्षात स्वरूप है। इस यंत्र की स्थापना से सौभग्य के द्वार खुलते हैं। इस यंत्र की अधिष्ठात्री देवी श्री ललिता हैं। ऐसा कहा जाता है कि जब श्रृष्टि पर कुछ नहीं था तब माता लक्ष्मी के विचार से एक मेरु उत्त्पन्न हुआ।

माता लक्ष्मी के विचार से उत्त्पन्न यह यंत्र ही मेरु श्री यंत्र कहलाया। इस यंत्र में ब्रह्मा, विष्णु सहित सभी देवी-देवतों का वास है।

इस यंत्र की पूजा करने से सभी सुखों की प्राप्ति होती है। जिस तरह मंत्र की शक्ति उसके शब्दों में होती है वैसे ही यंत्र की शक्ति उसकी रेखाओं और बिन्दुओं में होती है।

श्री यंत्र में 9 त्रिकोण होते हैं जिसे शिव के 9 मूल प्रकृतियों के संकेत के रूप में देखा जाता है। इस 9 त्रिकोण से मिलकर ही 45 त्रिभुज बनते हैं जो 45 देवताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इस यंत्र के बीच भाग में एक बिंदु होता है जो ककी समाधि का सूचक होता है। यह बिंदु शिव और शक्ति का संयुक्त रूप होता है। इस यंत्र में कुल मिलाकर 9 चक्र होते हैं जो देवियों का प्रतीक होता है।

श्री यंत्र के प्रकार और विशेषता

पारद श्री यंत्र- यह यंत्र सिद्धि और लक्ष्मी प्राप्ति के लिए रखा जाता है।

मेरु पृष्ठ अष्टधातु- इस यंत्र को परिवार में सुख शांति और धन पाने के लिए रखा जाता है।

स्फटिक श्री यंत्र- इस यंत्र को शांति, विद्या और समृद्धि के लिए रखा जाता है

स्वर्ण यंत्र- इस यंत्र को व्यवसाय में सफलता के लिए रखा जाता है।\

पिरामिड श्री यंत्र- यह यंत्र धन-धान्य और स्वास्थ्य के लिए रखा जाता है।

तांबे का श्री यंत्र- धन व समृद्धि के लिए यह यंत्र बेहद लाभदायक माना जाता है।

कैसे रखें यंत्र को

एक लाल कपड़ा बिछाकर उस पर महामेरु रखें। उसके एक तरफ जल का कलश रखें और उस पर ‘श्रीं’ यानी लक्ष्मी के बीज मंत्र का उच्चारण करें। फिर अंगूठे, रिंग फिंगर और मिडिल फिंगर से कुमकुम चढ़ाएं। इस तरह 11 दिन तक इसका अभिषेक करें। फिर इसे अपने धन स्थान पर रखें। कभी धन खत्म नहीं होगा।

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