सुख समृद्धि चाहते हैं तो घर में भूलकर भी न रखें ये वस्तुएं

0

आपको क्या लगता है कि वास्तु शास्त्र की विधा कितनी पुरानी है? इसका इस्तेमाल कब से हो रहा होगा? और यह धीरे-धीरे जनमानस में कैसे फैली? यदि हम आंकड़ों पर जाएं तो वास्तु शास्त्र का इतिहास लाखों वर्ष पुराना प्रतीत होता है। क्योंकि इस विधा का इस्तेमाल कई पौराणिक कथाओं में उल्लिखित है। उस समय में भी वास्तु निर्देशों का पालन कर लोग अपने घरों को वास्तु दोष मुक्त बनाते थे।

कौन सी दीवार किस दिशा में हो, कौन सा कक्ष कहां हो और कौन सी वस्तु कहां स्थित हो, यह खास ध्यान रखा जाता था। यहां तक कि वर्षों पहले मंदिरों एवं महलों को बनाने के लिए भी वास्तु शास्त्र की सहायता ली जाती थी। पुराणों में कई स्थानों पर वास्तु दोषों के शमन के लिए चित्र, नक्काशी, बेलबूटे, मनोहारी आकृतियों आदि के उपयोग का वर्णन है। राजा भोज का समरांगण सूत्रधार, विश्वकर्मा प्रकाश, राजबल्लभ, शिल्प संग्रह, विश्वकर्मीय शिल्प, बृहद्वास्तु माला आदि वास्तुशास्त्र के महत्वपूर्ण ग्रंथ माने जाते हैं। इन ग्रंथों में वास्तु दोषों के शमन हेतु चित्रों के उपयोग का विशद वर्णन है।

vastu-purush_1464846633

Loading...

Leave a Reply