भगवान क्यों करते हैं जानवरों की सवारी, जानें धार्मिक एवं वैज्ञानिक कारण

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सूर्य पुत्र शनि का वाहन कौवा

वैसे तो शनिदेव की 9 सवारियां है, लेकिन उनमें से उन्हें सबसे ज़्यादा कौवा ही पसन्द है. कौए स्वभाव से काफ़ी बुद्धिमान होते हैं. कौए की मौत कभी भी किसी बीमारी या दुर्घटना से नहीं होती है. इसकी मृत्यु आकस्मिक रूप से ही होती है.

कौए को भविष्य में घटने वाली चीजों का पहले से ही पता चल जाता है. इसे पित्रों का आश्रय स्थल भी कहा जाता है.

काल भैरव का साथी कुत्ता

दुनिया के बाकी पंथ और सम्प्रदायों में कुत्ते को लेकर काफ़ी मिली-जुली मान्यताएं हैं. हमारे सनातन धर्म में कुत्ते को तेज़ बुद्धि वाला प्राणी माना जाता है. कुत्ते को खाना खिलाने से काल भैरव ख़ुश होते हैं. कुत्ते को पास रखने से मनुष्य आकस्मिक मृत्यु से बचा रहता है. बुरी आत्माएं कभी भी कुत्ते के पास नहीं फटकती हैं.

सनातन धर्म के प्रवर्तकों ने आध्यात्म के साथ-साथ जो प्रकृति साम्य वातावरण तैयार किया, वो सभी धारणाएं इस धर्म को ख़ास बनाती हैं. जानवरों को भगवान का प्रतीक मानना वाकई में एक अजीब लेकिन अच्छी बात है.

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