भगवान क्यों करते हैं जानवरों की सवारी, जानें धार्मिक एवं वैज्ञानिक कारण

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मां सरस्वती ने चुना है हंस को

सरस्वती को ज्ञान को देवी कहा जाता है. ज्ञान से प्राणी के जीवन में पवित्रता, प्रेम और नैतिकता का आगमन होता है. इन सभी गुणों को का मिश्रण हंस में भी देखने को मिलता है.

हंस को काफ़ी समझदार और जिज्ञासु प्रवृत्ति का माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत तो यह है कि यह जीवनपर्यन्त एक ही हंसिनी के साथ रहता है. इसके ज्ञानी होने की वजह से शास्त्रों में कहा भी गया है, जो ज्ञानी है वो हंस हैं और जो कैवल्य को प्राप्त कर लेते हैं, वो परमहंस कहलाते हैं.

शिव की सवारी उनके प्यारे नंदी (बैल)

नंदी महादेव के सभी गणों में उन्हें सबसे ज़्यादा प्रिय है. जिस तरह शास्त्रों में कामधेनु को श्रेष्ठ माना जाता है, उसी तरह नंदी को भी श्रेष्ठ माना जाता है.

बैल स्वभाव से काफ़ी शान्त होता है, लेकिन जब इसे क्रोध आता है, तो यह शेर से भी भिड़ जाता है. महादेव का स्वभाव भी कुछ इसी तरह का है. बैल को भौतिक इच्छाओं से दूर रहने वाला प्राणी माना जाता है.

माता पार्वती को पसंद है, बाघ की सवारी

बाघ साहस और शौर्य का प्रतीक है. माता पार्वती एक बार जंगल में तपस्या करने गई थी, वहां एक बाघ उन्हें खाने के लिए आया. लेकिन मां पार्वती को देख कर वो भी उनके पास बैठ गया. सालों तक चली माता पार्वती की तपस्या के दौरान वो बाघ भी वहीं बैठा रहा.

जब मां पार्वती तपस्या पूर्ण करके उठी तो उन्हें इस बात का पता चला. बाघ की इस श्रद्धा से ख़ुश होकर उन्होंने इसे अपना वाहन बना लिया.

गणेश जी को आता है मूषक की सवारी में मज़ा

मूषक शब्द संस्कृत भाषा के मूष से बना है, जिसका मतलब होता है चुराना या लूटना. यह लक्षण स्वार्थी होने का परिचायक है. भगवान गणेश का मूषक पर बैठना यह दर्शाता है कि उन्होंने स्वार्थ और लालच पर विजय हासिल कर ली है. इसके पश्चात उन्होंने मानव कल्याण और परोपकार का रास्ता चुना है.

शिव पुत्र कार्तिकेय का वाहन है मयूर

भगवान कार्तिकेय को दक्षिण भारत में अधिक माना जाता है. मयूर का मन काफ़ी चंचल प्रकृति का होता है. उसे नियन्त्रण में रखना काफ़ी मशक्कतों भरा कृत्य है. कर्तिकेय की छवि एक साधक की तरह है, जिसने अपने मन को साध रखा है.

इंद्र का वाहन है, ऐरावत हाथी

देवताओं और राक्षसों ने मिल कर जब समुद्र मंथन किया था, तो अमृत कलश के साथ 14 तरह के रत्न भी निकले थे. उन्हीं में से एक था, ऐरावत.

हाथी को स्वभाव से शान्त और बुद्धिमान माना जाता है. इन्हीं विशेषताओं को देख कर राजा इंद्र ने इसे चुना.

मौत के ठेकेदार यमराज का वाहन है भैंसा

भैंसें का रूप देखने में काफ़ी भयानक लगता है, उसी तरह यमराज को भी काफ़ी भयानक समझा जाता है. भैंसें को एकता का प्रतीक भी माना जाता है. यह मुसीबत में पड़ने पर ही किसी पर हमला करता है, वरना यह काफ़ी शान्त रहता है. इसी तरह यमराज भी किसी मनुष्य का अन्तिम समय आने पर ही उससे मुखातिब होते है, इससे पहले वह जीवन भर किसी की ज़िन्दगी में कोई किरदार नहीं निभाते हैं.

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